Posts

 रामचरितमानस से आनंद की प्राप्ति के लिए चौपाई सुनहिं बिमुक्त बिरत अरु बिषई। लहहिं भगति गति संपति नई॥ खगपति राम कथा मैं बरनी। स्वमति बिलास त्रास दु:ख हरनी॥3॥ भावार्थ इसे जो जीवन्मुक्त, विरक्त और विषयी सुनते हैं, वे (क्रमशः)  भक्ति , मुक्ति और नवीन संपत्ति (नित्य नए भोग) पाते हैं। हे पक्षीराज गरुड़जी! मैंने अपनी बुद्धि की पहुँच के अनुसार रामकथा वर्णन की है, जो (जन्म-मरण) भय और दुःख हरने वाली है॥3॥

नववर्ष विक्रम संवत 2078 -- भारत मॉरीशस डिजिटल प्लेटफॉर्म

नववर्ष 2078

साहित्य संवाद हाइकु संगोष्ठी

  https://hindihaiku.wordpress.com/2021/04/14/2150/

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2021 पर कविता

  नारी का अधिकार   आज हमारा दिन है क्या न ! हमें न बांधे कोई। हमें न बांधे कोई किसी दिन में, किसी साल में न ही किसी और बंदिश में। नारी बंदिशों से नहीं बंधन से बंध जाती है रिश्तों की अहमीयत समझती और समझाती है। उसे नहीं रहना प्रतिस्पर्धा में पुरुष से कदापि वह जानती है, समझती है शिव और शक्ति के संतुलन का महत्व वह तो बस समानता चाहती है। वह अंतरिक्ष में जा पहुंची है, विमान भी उड़ाती है वह जांबाज़ योद्धा भी है, किसी चुनौती से नहीं घबराती है।   उसकी ऊंचाइयों में आसमान है, बेशक   जानती है लेकिन ठोस ज़मीन का सच   रसोई में रहकर भी वह कितना कुछ रच जाती है। नारी जो बस घर में रहती है वह भी कम नहीं है किसी से खुद पढ़ी हो, न   पढ़ी हो वही तो सबको लायक बनाती है। माँ, पत्नी, बहन और बहू-बेटी बनकर सपने देखने की सिर्फ प्रेरणा ही नहीं बल्कि आकार भी देती है सबके सपनों को। खड़ी रहती है साथ कंधे से कंधा मिलाकर मेहनत करने की ताकत देती है खिला-पिलाकर रातें अपनी भी बिताती है साथ जाग-जाग कर सपनों को पूरा करने की हिम्म...