रामचरितमानस से आनंद की प्राप्ति के लिए
सुनहिं बिमुक्त बिरत अरु बिषई। लहहिं भगति गति संपति नई॥ |
- भावार्थ
इसे जो जीवन्मुक्त, विरक्त और विषयी सुनते हैं, वे (क्रमशः) भक्ति, मुक्ति और नवीन संपत्ति (नित्य नए भोग) पाते हैं। हे पक्षीराज गरुड़जी! मैंने अपनी बुद्धि की पहुँच के अनुसार रामकथा वर्णन की है, जो (जन्म-मरण) भय और दुःख हरने वाली है॥3॥
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