अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2021 पर कविता

 

नारी का अधिकार

 

आज हमारा दिन है क्या

!

हमें न बांधे कोई।

हमें न बांधे कोई

किसी दिन में, किसी साल में

न ही किसी और बंदिश में।

नारी बंदिशों से नहीं

बंधन से बंध जाती है

रिश्तों की अहमीयत

समझती और समझाती है।

उसे नहीं रहना प्रतिस्पर्धा में

पुरुष से कदापि

वह जानती है, समझती है

शिव और शक्ति के संतुलन का महत्व

वह तो बस समानता चाहती है।

वह अंतरिक्ष में जा पहुंची है,

विमान भी उड़ाती है

वह जांबाज़ योद्धा भी है,

किसी चुनौती से नहीं घबराती है।

 उसकी ऊंचाइयों में आसमान है, बेशक

 जानती है लेकिन ठोस ज़मीन का सच 

रसोई में रहकर भी वह कितना कुछ रच जाती है।

नारी जो बस घर में रहती है

वह भी कम नहीं है किसी से

खुद पढ़ी हो, न  पढ़ी हो

वही तो सबको लायक बनाती है।

माँ, पत्नी, बहन और बहू-बेटी बनकर

सपने देखने की सिर्फ प्रेरणा ही नहीं

बल्कि आकार भी देती है सबके सपनों को।

खड़ी रहती है साथ कंधे से कंधा मिलाकर

मेहनत करने की ताकत देती है खिला-पिलाकर

रातें अपनी भी बिताती है साथ जाग-जाग कर

सपनों को पूरा करने की हिम्मत दिलाती है।

लड़खड़ाता है जो, उसका सहारा बन जाती है

घर के कोने-कोने को ही नहीं संवारती

पूरे संसार को सजाती है।

नारी केवल नाम, केवल पद और

केवल अधिकार नहीं माँगती

वह तो अपने हिस्से का सम्मान चाहती है।

 

Comments

  1. Replies
    1. धन्यवाद आपका, कुछ वीडियो साझा करने के संबंध में पूछना है। शुक्रवार को बात करूंगी।
      आभार

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  2. बहुत खूब👍👌👌👌

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